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महिला एवं बाल विकास 04

 पोषण अभियान

भारत सरकार द्वारा कुपोषण के स्तर में कमी लाने के लिए एक वृहत अभियान के रूप में पोषण अभियान का शुभारंभ किया गया है।यह शुभारंभ 08 मार्च 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा झुंझूनू , राजस्थान में किया गया है।पोषण अभियान देश के सभी राज्यों में वित्तीय वर्ष 2017-18 से आगामी तीन वर्षों में चरण बद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।प्रथम चरण में राज्य के 12 जिलों को लिया गया था तथा द्वितीय चरण वर्ष 2018-19 से शेष 15 जिलों को लिया गया है।इस प्रकार राज्य के सभी 27 जिलों में पोषण अभियान क्रियान्वित है।पोषण अभियान के लक्ष्य एवं घटकांे का विवरण निम्नानुसार है:-

 अभियान के लक्ष्य:-

पोषण अभियान का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित किया गया है , जिसके अनुसार 0 से 6 वर्ष आयु समूह के बच्चों , गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं में विद्यमान कुपोषण स्तर को चरण बद्ध तरीके से प्रति वर्ष 02 प्रतिशत की कमी लाते हुए 03 वर्षों में 06 प्रतिशत की कमी लाना लक्षित किया गया है।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान

छत्तीसगढ़ राज्य में 06 वर्ष से कम आयु के बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं एनीमिया तथा 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में व्याप्त एनीमिया एक चुनौती है जिसे जड़ से समाप्त करने का निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ राज्य में NFHS-4 के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 05 वर्ष से कम आयुवर्ग केलगभग 37-7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण एवं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 47 प्रतिशत महिलायें एनीमिया से पीड़ित है। 

बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्तर में सकारात्मक सुधार हेतु आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा जिले में माननीय मुख्यमंत्रीजी की मंशानुसार ‘‘सुपोषित दंतेवाड़ा अभियान‘‘ दिनांक 24 जून 2019 में प्रारंभ किया गया।अभियान की सफलता को देखते हुये प्रदेश के अन्य जिलों में भी गांधीजी के 150 वीं जयंती के अवसर पर 02 अक्टूबर 2019 से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया है।

अभियान का प्रमुख उद्देश्य 06 वर्ष आयु तक के बच्चे में कुपोषण एवं एनीमिया तथा 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को एनीमिया से मुक्त करना है। अभियान अंतर्गत प्रदेश के लगभग 1-85 लाख हितग्राहियों को गर्म भोजन एवं 3-53 लाख हितग्राहियों को अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में अण्डा, चिकी, लड्डू, मूंगफली, दलिया आदि प्रदान किया जा रहा है।इसके अतिरिक्त एनीमिक बच्चे एवं महिलाओं के आई.एफ.ए. अथवा सिरप कृमि नाशक दवा एवं व्यवहार तथा खान पान में सकारात्मक परिवर्तन के लिए परामर्श सेवाएँ दी जा रही है।

इस अभियान की मुख्य बात यह है कि अभियान का क्रियान्वयन जन सहयोग एवं सहभागिता से किया जा रहा है।इस अभियान के क्रियान्वयन में होने वाले व्यय की प्रति पूर्ति जिला स्तर पर उपलब्ध खनिज न्यास निधि एवं सी.एस.आर. मद तथा जन सहयोग से प्राप्त धनराशि से किया जा रहा है ।इसके लिए मुख्यमंत्री सुपोषण निधि का गठन किया गया है।

जिले की परिस्थिति एवं आवश्यकता अनुरूप अभियान का संचालन के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना एवं रणनीति तैयार कर क्रियान्वयन किया जा रहा है।

इस अभियान को 03 वर्ष के लिए चलाये जाने का निर्णय लिया गया है।अभियान को योजना बद्ध तथा सतत्जारी रखने के लिए अभियान को योजना का रूप देने पर विचार किया जा रहा है।

महतारीजतन योजना

योजना के तहत आंगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से आकर्षक थाली गर्भवती महिलाओं को पृथक-पृथक मेन्यू अनुसार प्रदाय की जा रही है]जिसमें चांवल, दाल, रोटी, रसेदार व सूखी सब्जी, अचार, पापड़ सलाद आदि दिया जा रहा है।इसके अतिरिक्त महिलाओं को घर ले जाने हेतु प्रतिदिन 75 ग्राम के मान से (सप्ताह में 06 दिवस हेतु) 450 ग्राम का साप्ताहिक पैकेट रेडी टू ईट दिया जाने का प्रावधान है।प्रदेश में लगभग 1-61 लाख महिलाओं को इस योजना से लाभांवित किया जा रहा है।वर्ष 2019&20 में इस हेतु 23-50 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है।

 

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

प्रदेश में गरीब परिवारों को कन्या के विवाह के सम्बन्ध में होने वाली कठिनाई को देखते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना लागू की गई है।

उद्देश्यः-

गरीब परिवारों को कन्या के विवाह के संदर्भ में होने वाली आर्थिक कठिनाईयों का निवारण, विवाह के अवसर पर होने वाले फिजूलखर्ची को रोकना एवं सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देने, सामूहिक विवाहों के आयोजन के माध्यम से मनोबल/आत्मसम्मान में वृद्धि एवं उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार, सामूहिक विवाहों का प्रोत्साहन तथा विवाहों में दहेज के लेन-देन की रोकथाम करना।

योजनांतर्गत सहायताः- 

गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार/मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना अन्तर्गत कार्डधारी परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो कन्याओं को योजना अन्तर्गत लाभ दिलाया जाना है। योजना अन्तर्गत प्रत्येक कन्या के विवाह हेतु अधिकतम 25,000/- रूपये की राशि व्यय किए जाने का प्रावधान है। इसमें से वर-वधु हेतु श्रृंगार सामग्री पर राशि 5,000/- रूपयेअन्य उपहार सामग्री पर राशि 14,000/- रूपये, वधु को बैंक ड्राफ्ट के रूप में राशि 1,000/- रूपये तथा सामूहिक विवाह आयोजन पर प्रति कन्या राशि 5,000/-रूपये तक व्यय की जा सकती है। राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अन्तर्गत विधवा/अनाथ/निराश्रित कन्याओं को भी शामिल किया गया है।

संपर्कः-

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवक्षेक, बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी।

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