Gender अथवा लिंग क्या है? यह सामाजिक और सांस्कृतिक अवधारणा है – समाज किस तरह “पुरुष” और “महिला” से विशेष तरह का व्यवहार, गुण और भूमिकाएँ अपेक्षित करता है। यह सीखा हुआ (learned) होता है, जन्म से तय नहीं होता। जैसे “लड़के रोते नहीं”, “लड़कियाँ गुलाबी रंग पहनती हैं” , “ घर का काम और बच्चों की देखभाल माँ की जिम्मेदारी है ” – ये सब Gender norms या Gender roles हैं, न कि जैविक सच्चाई। सरल उदाहरण: दो बच्चे मान लीजिए – राहुल और नेहा। दोनों का Sex जन्म के समय “ मेल ” और “ फीमेल ” लिखा गया। अब अगर परिवार राहुल से कहे कि “ तुम बाहर की नौकरी करोगे, परिवार चलाओगे ” और नेहा से कहे “ तुम्हें रसोई और बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी है ” – तो यह Gender है, यानी समाज द्वारा बनाई गई भूमिकाएँ । Sex और Gender में मुख्य अंतर (आसान तुलना) Sex (सेक्स) = जैविक पहचान किस प्रकार का शरीर है – प्रजनन अंग, क्रोमोसोम, हार्मोन आदि उदाहरण : Male, Female, Intersex लिखना Gender (जेंडर/लिंग) = सामाजिक‑सांस्कृतिक पहचान समाज किसे “पुरुषोचित” और “स्त्रियोचित” मानता है – पहनावा, व्यवहार,...